हरिद्वार, 25 जुलाई। पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच समाजवादी पार्टी के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष महंत शुभम गिरी ने केंद्र सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के साथ कठोरता बरतना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार का दायित्व आंदोलनकारियों की आवाज़ को दबाना नहीं, बल्कि संवाद के माध्यम से उनकी समस्याओं का समाधान निकालना है।
महंत शुभम गिरी ने कहा कि हाल के दिनों में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों ने देशभर के लाखों छात्रों और युवाओं को चिंता में डाल दिया है। अपने भविष्य और रोजगार को लेकर परेशान छात्र लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचा रहे हैं। ऐसे में उनकी बात सुनने के बजाय यदि उन पर बल प्रयोग किया जाता है तो यह लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
उन्होंने प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा किए गए कथित बल प्रयोग पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि यदि महिलाओं के साथ पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा बल प्रयोग की घटनाएं हुई हैं, तो यह अत्यंत गंभीर विषय है और इसकी निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था बनाए रखना आवश्यक है, लेकिन नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और सम्मान की रक्षा करना भी सरकार की समान जिम्मेदारी है।
महंत शुभम गिरी ने कहा कि देशभर में छात्र, बेरोजगार युवा और विभिन्न वर्ग अपनी समस्याओं को लेकर लगातार आवाज़ उठा रहे हैं। सरकार को शिक्षा व्यवस्था, रोजगार, भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशील रवैया अपनाते हुए प्राथमिकता के आधार पर ठोस निर्णय लेने चाहिए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाओं ने युवाओं का व्यवस्था पर भरोसा कमजोर किया है, जिसे दोबारा स्थापित करना सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के अनशन समाप्त होने को सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि आंदोलन के दौरान सामने आई घटनाओं ने पूरे देश को लोकतांत्रिक मूल्यों और नागरिक अधिकारों पर गंभीरता से सोचने पर मजबूर किया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज़ को सुनना और संवाद के माध्यम से समाधान निकालना ही किसी भी जिम्मेदार सरकार की पहचान होती है।
महंत शुभम गिरी ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की थी। अब उनके इस्तीफे को नैतिक जवाबदेही की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है। हालांकि उन्होंने कहा कि केवल इस्तीफा ही पर्याप्त नहीं है। सरकार को शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने, पेपर लीक जैसी घटनाओं पर कठोर कार्रवाई करने तथा छात्रों और युवाओं का विश्वास दोबारा कायम करने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने होंगे।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार समय रहते छात्रों और युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं करती है, तो असंतोष लगातार बढ़ता जाएगा। लोकतंत्र की मजबूती इसी में है कि सरकार जनता की आवाज़ सुने, संवाद स्थापित करे और संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप निर्णय ले।
महंत शुभम गिरी ने अंत में कहा कि देश का युवा ही राष्ट्र का भविष्य है। इसलिए सरकार को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर छात्रों और युवाओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने अपील की कि सभी पक्ष शांति और संयम बनाए रखें तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत बातचीत के माध्यम से समस्याओं का स्थायी समाधान निकालने की दिशा में आगे बढ़ें।
पेपर लीक आंदोलन पर महंत शुभम गिरी का सरकार पर निशाना, बोले— छात्रों की आवाज़ दबाना लोकतंत्र के हित में नहीं, संवाद से निकले समाधान

