गुरुकुल कांगड़ी में अस्थायी कर्मचारियों का आंदोलन तेज, दूसरे दिन भी नहीं टूटी हड़ताल

प्रशासन से वार्ता नहीं होने पर बढ़ा आक्रोश, ‘No Work, No Pay’ आदेश वापस लेने और लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग

उत्तराखंड ब्यूरो | राजकुमार

हरिद्वार। गुरुकुल कांगड़ी समविश्वविद्यालय में अस्थायी कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रही। अपनी विभिन्न मांगों को लेकर कर्मचारी कुलसचिव कार्यालय परिसर में दिन-रात धरने पर डटे रहे। कर्मचारियों का कहना है कि वे लंबे समय से विश्वविद्यालय में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन की ओर से अब तक प्रभावी वार्ता की पहल नहीं की गई है। दूसरे दिन भी वार्ता नहीं होने से कर्मचारियों में रोष और बढ़ गया।

कर्मचारियों का कहना है कि उनका आंदोलन केवल वेतन से जुड़ी मांगों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके सम्मान, सेवा सुरक्षा और भविष्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे इसमें शामिल हैं। संघ पदाधिकारियों के अनुसार, अंतरिम कुलपति प्रो. प्रतिभा मेहता लूथरा द्वारा अस्थायी कर्मचारियों के लिए कथित रूप से की गई “केकड़ा” टिप्पणी को लेकर भी कर्मचारियों में नाराजगी है। कर्मचारी इस मामले में सार्वजनिक रूप से माफी की मांग कर रहे हैं।

इसके अलावा कुलसचिव की ओर से जारी किए गए ‘No Work, No Pay’ आदेश, पत्रांक Reg/2026-27/2330, को वापस लेने की मांग भी आंदोलन का प्रमुख मुद्दा है। कर्मचारियों का कहना है कि इस आदेश से उनके सामने आर्थिक संकट की स्थिति पैदा हो सकती है।

दस साल से अधिक सेवा वाले कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग

अस्थायी कर्मचारी संघ ने मांग की है कि विश्वविद्यालय में 10 वर्ष से अधिक समय से लगातार सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को नियमित किया जाए। संघ का कहना है कि वर्षों से विश्वविद्यालय की व्यवस्थाओं में योगदान देने वाले कर्मचारियों के भविष्य को लेकर स्पष्ट नीति बनाई जानी चाहिए।

वहीं, 10 वर्ष से कम सेवा वाले अस्थायी कर्मचारियों के लिए संघ ने न्यूनतम 18 हजार रुपये प्रतिमाह निश्चित वेतन निर्धारित किए जाने की मांग उठाई है। कर्मचारियों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो रहा है और लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उनकी आय को लेकर स्थायित्व नहीं है।

‘वार्ता से निकलेगा समाधान’, लेकिन पहल का इंतजार

धरना स्थल पर संघ के शाखा अध्यक्ष सोनू कुमार, शाखा महासचिव सुरेन्द्र कुमार, कोषाध्यक्ष सागर तेश्वर और शाखा संगठन महामंत्री नवदीप भारद्वाज ने कहा कि कर्मचारी प्रशासन से टकराव नहीं चाहते। उनकी प्राथमिकता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन उनके साथ बैठकर समस्याओं पर चर्चा करे और मांगों का समाधान निकाले।

पदाधिकारियों ने कहा कि हड़ताल के दूसरे दिन भी प्रशासन की ओर से वार्ता के लिए कोई पहल नहीं हुई। उनका कहना है कि यदि प्रशासन कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लेकर बातचीत शुरू करता है तो समाधान का रास्ता निकल सकता है। लेकिन लगातार वार्ता नहीं होने से कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।

संघ पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यदि मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे और व्यापक किया जा सकता है।

हड़ताल से विश्वविद्यालय की सफाई व्यवस्था प्रभावित

अस्थायी कर्मचारियों की हड़ताल का असर विश्वविद्यालय की सफाई व्यवस्था पर भी दिखाई दिया। कर्मचारियों के कार्य से अलग रहने के कारण मंगलवार को सफाई व्यवस्था प्रभावित रही।

कर्मचारियों का कहना है कि वे विश्वविद्यालय की व्यवस्था को बाधित करना नहीं चाहते, लेकिन अपनी मांगों को लेकर उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि स्थिति को लंबा खींचने के बजाय जल्द से जल्द वार्ता की जाए, ताकि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान हो और विश्वविद्यालय का कामकाज भी सामान्य रूप से चल सके।

राष्ट्रीय दलित पिछड़ा वर्ग संगठन ने दिया समर्थन

कर्मचारियों के आंदोलन को राष्ट्रीय दलित पिछड़ा वर्ग संगठन, गुरुकुल कांगड़ी शाखा की ओर से भी समर्थन दिया गया। संगठन के शाखा अध्यक्ष संजय कुमार, शाखा प्रभारी जॉनी टांक और महामंत्री आनंद सिंह धरना स्थल पर पहुंचे।

संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि वे कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग की कि कर्मचारियों की समस्याओं को गंभीरता से लिया जाए और उनके साथ जल्द वार्ता कर समाधान का रास्ता निकाला जाए।

छात्र नेताओं ने भी प्रशासन से संवाद की अपील की

धरना स्थल पर पहुंचे छात्र नेताओं आशु मलिक और सोकेन्द्र बालियान ने भी कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन किया। छात्र नेताओं ने कहा कि विश्वविद्यालय में लंबे समय तक कर्मचारियों और प्रशासन के बीच टकराव की स्थिति बने रहना किसी के हित में नहीं है।

उन्होंने कहा कि प्रशासन को कर्मचारियों के साथ तत्काल बातचीत शुरू करनी चाहिए और उनकी मांगों पर सकारात्मक तरीके से विचार करना चाहिए। छात्र नेताओं ने यह भी कहा कि यदि जल्द वार्ता शुरू नहीं हुई और कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाया गया तो छात्रों की बैठक बुलाकर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

दूसरे दिन भी धरने पर डटे रहे कर्मचारी

मंगलवार को भी कर्मचारी धरना स्थल पर लगातार मौजूद रहे। कर्मचारियों और उनके समर्थकों ने अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। आंदोलन के दौरान मुख्य रूप से कर्मचारियों के नियमितीकरण, न्यूनतम वेतन, ‘No Work, No Pay’ आदेश वापस लेने और कथित टिप्पणी को लेकर सार्वजनिक माफी की मांग उठाई गई।

धरना स्थल पर शाखा अध्यक्ष सोनू कुमार, शाखा महासचिव सुरेन्द्र कुमार, शाखा संगठन महामंत्री नवदीप भारद्वाज, छात्र नेता आशु मलिक एवं सोकेन्द्र बालियान, रविकांत मलिक, रजनीश भारद्वाज, संजय कुमार, जॉनी टांक, आनंद सिंह, दीपक वर्मा सहित 100 से अधिक कर्मचारी एवं समर्थक मौजूद रहे।

अब कर्मचारियों की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन की अगली पहल पर है। कर्मचारियों का कहना है कि यदि प्रशासन वार्ता के लिए आगे आता है तो वे बातचीत के माध्यम से समाधान तलाशने को तैयार हैं, जबकि वार्ता नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे बढ़ाने की रणनीति पर विचार किया जाएगा।

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