BHEL की भूमि पर अतिक्रमण को लेकर बढ़ा विवाद, स्थानीय लोगों ने उठाए प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल

हरिद्वार। हरिद्वार स्थित BHEL सेक्टर-1 के पीछे फैली BHEL की भूमि एक बार फिर चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस भूमि पर लंबे समय से वन गुर्जर परिवार रह रहे हैं, जबकि वन गुर्जरों के पुनर्वास के लिए सरकार द्वारा पथरी क्षेत्र में भूमि उपलब्ध कराई जा चुकी है। ऐसे में स्थानीय नागरिक BHEL प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं और पूछ रहे हैं कि यदि भूमि BHEL की है, तो इसे अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 2021-22 में नैनीताल हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद वन गुर्जरों के पुनर्वास की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया था। उनके अनुसार पात्र परिवारों को पथरी क्षेत्र में लगभग 0.8 हेक्टेयर (करीब 10 बीघा) भूमि आवंटित की गई, जिसमें लगभग 2 बीघा आवास और पशुपालन तथा 8 बीघा खेती और चारे के लिए निर्धारित की गई थी। इसके बाद भी यदि BHEL की भूमि पर रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो यह अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों ने लगाए गंभीर आरोप
आसपास रहने वाले लोगों का कहना है कि क्षेत्र में बड़ी संख्या में भैंसों को खुले में छोड़ दिया जाता है। उनका आरोप है कि इन पशुओं के कारण सड़क पर आने-जाने वाले लोगों को लगातार परेशानी होती है और कई बार दुर्घटनाएं भी हो चुकी हैं। लोगों का कहना है कि शाम और रात के समय सड़क पर पशुओं का जमावड़ा होने से वाहन चालकों को भारी जोखिम उठाना पड़ता है।
BHEL प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि संबंधित भूमि BHEL की है, तो उसकी सुरक्षा और देखरेख की जिम्मेदारी भी BHEL प्रशासन की है। लोगों का सवाल है कि क्या BHEL प्रशासन ने कभी इस क्षेत्र का संयुक्त निरीक्षण कराया? क्या अतिक्रमण को लेकर कोई सर्वे कराया गया? यदि कराया गया तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई? और यदि सर्वे नहीं हुआ, तो आखिर क्यों?
लोगों का यह भी कहना है कि यदि सरकारी या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम की भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतें वर्षों से सामने आ रही हैं, तो समय रहते प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इसी कारण अब BHEL प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जनहित और सुरक्षा से जुड़ा मामला
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल भूमि का विवाद नहीं है, बल्कि जनसुरक्षा का विषय भी है। उनका मानना है कि यदि सड़कों पर खुले पशुओं की समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो भविष्य में और गंभीर हादसे हो सकते हैं। उन्होंने प्रशासन से क्षेत्र का संयुक्त निरीक्षण कराने, भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और नियमों के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।
प्रशासन से जवाब का इंतजार
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पुनर्वास की व्यवस्था पहले ही हो चुकी है, तो BHEL की भूमि को लेकर उठ रहे विवाद का समाधान कब होगा? क्या BHEL प्रशासन इस मामले में अपना आधिकारिक पक्ष रखेगा? क्या संबंधित विभाग संयुक्त जांच कर वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखेंगे?
समाचार प्रहरी 24 इस पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है। जैसे ही BHEL प्रशासन या संबंधित विभाग का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होगा, उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा, ताकि पाठकों के सामने सभी पक्षों की जानकारी रखी जा सके।

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