हरिद्वार:- सिंचाई विभाग उत्तर प्रदेश पर गंभीर आरोप, रातों-रात आश्रम खाली कराने से मचा बवाल,संतों का अपमान?

हरिद्वारधर्मनगरी हरिद्वार में उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। आरोप है कि विभाग के अधिकारियों ने रातों-रात एक आश्रम को खाली कराकर वहां वर्षों से रह रहे लोगों को बेदखल कर दिया। इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों, साधु-संतों और क्षेत्रवासियों में भारी रोष व्याप्त है।

बताया जा रहा है कि जिस आश्रम को खाली कराया गया, वहां लंबे समय से साधु-संत और अन्य लोग रह रहे थे। आरोप है कि कार्रवाई के दौरान लोगों को डराया-धमकाया गया, झुग्गियों को नुकसान पहुंचाया गया तथा आश्रम का सामान भी जब्त कर ले जाया गया। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि पूरी रात आश्रम परिसर में हंगामे जैसी स्थिति बनी रही।

एक ही आश्रम पर कार्रवाई, बाकी कब्जों पर क्यों खामोशी?

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि सिंचाई विभाग की भूमि पर वर्षों से कई स्थानों पर कब्जों की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन कार्रवाई केवल इसी एक आश्रम पर क्यों की गई? स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग ने चयनात्मक कार्रवाई करते हुए इस आश्रम को खाली कराया है।

क्षेत्र में चर्चा है कि उक्त आश्रम को खाली कराने के पीछे किसी प्रभावशाली व्यक्ति या राजनीतिक संरक्षण प्राप्त लोगों को लाभ पहुंचाने की मंशा हो सकती है। कुछ लोगों ने आरोप लगाया है कि किसी मंत्री से जुड़े व्यक्तियों को आश्रम उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई। हालांकि इन आरोपों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

साधु-संतों के साथ अभद्रता के आरोप

कार्रवाई को लेकर साधु-संतों में भी नाराजगी देखी जा रही है। आरोप है कि आश्रम में रह रहे संतों के साथ अधिकारियों द्वारा अभद्र व्यवहार किया गया। धर्मनगरी हरिद्वार में संत समाज का सम्मान सदैव सर्वोपरि माना जाता रहा है, ऐसे में यह मामला धार्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से संवेदनशील बन गया है।
लोगों का कहना है कि एक ओर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संत समाज के सम्मान और संरक्षण की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर उन्हीं के अधीन विभाग के अधिकारियों पर संतों के अपमान और उत्पीड़न के आरोप लग रहे हैं।

अधिकारियों पर अपने लोगों को बसाने के आरोप

कुछ स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि हरिद्वार में सिंचाई विभाग के कुछ अधिकारी विभागीय भूमि पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रहे हैं और अपने परिचितों अथवा चहेतों को जगह उपलब्ध कराने का प्रयास कर रहे हैं। आरोपों के अनुसार भविष्य में स्थायी कब्जे और निजी लाभ की मंशा से इस प्रकार की कार्रवाई की जा रही है।

इतिहास में पहली बार ऐसा मामला?

स्थानीय लोगों का दावा है कि हरिद्वार के इतिहास में संभवतः यह पहला अवसर है जब उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा किसी आश्रम को रातों-रात खाली कराया गया हो। इस कार्रवाई के पीछे वास्तविक कारण क्या हैं और किसके निर्देश पर यह कदम उठाया गया, इसे लेकर तमाम सवाल खड़े हो रहे हैं।

जांच और पारदर्शिता की मांग
अब क्षेत्र के लोगों और संत समाज द्वारा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि कार्रवाई वैधानिक थी तो उसके आदेश, नोटिस और अन्य दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। वहीं यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
फिलहाल इस मामले में सिंचाई विभाग की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। आने वाले दिनों में विभाग का पक्ष और जांच की दिशा इस पूरे विवाद की सच्चाई सामने ला सकती है।

(नोट: समाचार में उल्लिखित कई बिंदु स्थानीय लोगों और संबंधित पक्षों द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित हैं। आधिकारिक जांच अथवा विभागीय पक्ष आने के बाद तथ्यों की स्थिति स्पष्ट होगी।)

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