उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग पर उठे सवाल!गंगा में बिना परमिशन हो रहा है घाट का निर्माण? चल रही जेसीबी-पोकलैंड, NGT नियमों की अनदेखी!

हरिद्वार संवाददाता । गंगा संरक्षण और पर्यावरण नियमों के पालन को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हरिद्वार में उत्तरी गंग नहर क्षेत्र में चल रहे निर्माण कार्य को लेकर स्थानीय लोगों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। आरोप है कि गंगा में बंधन निर्माण के नाम पर ठेकेदार द्वारा गंगा से निकले पत्थर और अन्य सामग्री को ट्रैक्टरों में लोड कर बाहर बेचा जा रहा है, जिससे मोटा मुनाफा कमाया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय पोकलैंड मशीनों की मदद से गंगा क्षेत्र में खुदाई की जाती है। लोगों का आरोप है कि बड़े स्तर पर मशीनों के संचालन के बावजूद संबंधित विभाग की निगरानी नजर नहीं आ रही है।
वहीं सवाल यह भी उठ रहा है कि एनजीटी के नियमों के अनुसार गंगा और उसके आसपास होने वाले निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक अनुमति और पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जा रहा है या नहीं। आरोप है कि गंगा के अंदर जेसीबी और बड़े-बड़े पोकलैंड मशीनों का संचालन किया जा रहा है, लेकिन विभागीय स्तर पर इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया जा रहा।
मामले को लेकर जब उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिकारियों से पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो अधिशासी अभियंता से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन अधिकारी द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया।
वहीं एसडीओ से जब इस मामले में बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि उनके पास मीडिया को बयान देने की अथॉरिटी नहीं है। एसडीओ ने मौके पर हो रहे निर्माण को घाट नहीं बल्कि गेजिंग पॉइंट बताया।
लेकिन इस बयान पर भी सवाल खड़े हो गए, क्योंकि मौके पर मौजूद ठेकेदार ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि यहां घाट का निर्माण कराया जा रहा है। ठेकेदार ने यह भी बताया कि यह घाट एक आश्रम के लिए बनाया जा रहा है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर मौके पर घाट निर्माण हो रहा है तो विभागीय अधिकारी इसे गेजिंग पॉइंट क्यों बता रहे हैं? क्या विभाग को वास्तविक स्थिति की जानकारी नहीं है या फिर मामले को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है?
उठते बड़े सवाल:
क्या गंगा क्षेत्र में पोकलैंड और जेसीबी चलाने के लिए अनुमति ली गई है?
क्या एनजीटी के नियमों का पालन किया जा रहा है?
गंगा से निकाले जा रहे पत्थर और सामग्री को बाहर क्यों ले जाया जा रहा है?
क्या ठेकेदार को गंगा से सामग्री निकालने और बेचने की अनुमति है?
रात के समय खुदाई होने के आरोपों की जांच कौन करेगा?
विभागीय अधिकारी मौके की वास्तविक स्थिति और ठेकेदार के बयान में अंतर को कैसे स्पष्ट करेंगे?
फिलहाल इस पूरे मामले ने उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि विभाग इस मामले में जांच करता है या फिर आरोपों पर चुप्पी साधे रहता है।

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