रिपोर्ट- उत्तराखंड ब्यूरो
चमोली, 29 अगस्त 2026।
जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान मंडल की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, मुख्य विकास अधिकारी एवं निदेशक, जड़ी-बूटी शोध एवं विकास संस्थान, चमोली ने की। बैठक में प्रदेश में जड़ी-बूटी कृषिकरण को बढ़ावा देने, किसानों को इससे जोड़ने, नर्सरी विकसित करने और शोध कार्यों को प्रभावी बनाने को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक की शुरुआत में वैज्ञानिक डॉ. डी.एस. बिष्ट ने अपने से संबंधित जनपदों में जड़ी-बूटी कृषिकरण, इससे जुड़े विभिन्न कार्यों और चल रहे शोध कार्यों की जानकारी निदेशक के समक्ष रखी। इसके बाद वैज्ञानिक डॉ. सी.पी. कुनियाल तथा वैज्ञानिक डॉ. अरविंद कुमार भंडारी ने भी अपने-अपने जनपदों में जड़ी-बूटी से संबंधित गतिविधियों और प्रगति की जानकारी दी।
इसके उपरांत निदेशक डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने प्रत्येक जनपद में कार्यरत मास्टर ट्रेनरों द्वारा किए जा रहे कार्यों की जानकारी ली और जड़ी-बूटी क्षेत्र को जमीनी स्तर पर और मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।
निदेशक ने सिमली स्थित संस्थान की नर्सरी में अपराजिता की पौध लगाने के निर्देश दिए। साथ ही मास्टर ट्रेनरों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने जनपदों में किसानों द्वारा उत्पादित की जा रही सभी प्रकार की जड़ी-बूटियों का विस्तृत डाटा तैयार करें। इसमें रवन्ने वाली और बिना रवन्ने वाली दोनों प्रकार की उत्पादित जड़ी-बूटियों की जानकारी शामिल करने को कहा गया।
बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि यदि किसी सरकारी विभाग या संस्था द्वारा किसानों को जड़ी-बूटी के पौधों का वितरण किया जा रहा है तो उसकी जानकारी भी व्यवस्थित रूप से एकत्रित की जाए।
शोध और शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में भी अहम निर्णय लिया गया। सभी वैज्ञानिकों को निर्देशित किया गया कि संस्थान में डिजर्टेशन के लिए आने वाले विद्यार्थियों के लिए उपयोगी स्टडी मैटेरियल तैयार किया जाए और संस्थान में अध्ययन के लिए आने वाले छात्रों को इस सामग्री से अवगत कराया जाए।
जड़ी-बूटी कृषिकरण को प्रत्येक विकासखंड तक पहुंचाने के लिए जनपद समन्वयकों को निर्देश दिए गए कि प्रत्येक मास्टर ट्रेनर को विकासखंड आवंटित कराया जाए, ताकि क्षेत्रवार जड़ी-बूटी से संबंधित गतिविधियों को गति दी जा सके।
इसके साथ ही प्रत्येक जनपद में जड़ी-बूटी की नर्सरी विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। मास्टर ट्रेनरों को निर्देश दिए गए कि उद्यान विभाग की नर्सरियों में स्थान उपलब्ध कराकर अथवा अन्य सरकारी भूमि पर नर्सरी स्थापना की दिशा में कार्य शुरू किया जाए, जिससे जरूरत के अनुसार किसानों को जड़ी-बूटी के पौधे उपलब्ध कराए जा सकें।
बैठक में महिला समूहों को जड़ी-बूटी नर्सरी से जोड़ने की पहल पर भी जोर दिया गया। प्रत्येक मास्टर ट्रेनर को दो-दो महिला समूहों को नर्सरी स्थापना के लिए प्रोत्साहित करने और उन्हें आवश्यक प्रशिक्षण देने का लक्ष्य दिया गया। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।
वहीं, जड़ी-बूटी की खेती कर रहे किसानों का व्यवस्थित डाटा तैयार करने के लिए प्रत्येक जनपद में कृषक डाटा बैंक तैयार करने के निर्देश दिए गए। किसान पंजीकरण पोर्टल को आईटीडीए के साथ समन्वय कर वहां दर्ज कराने के निर्देश भी दिए गए।
निदेशक ने सभी मास्टर ट्रेनरों को अपने-अपने जनपद के मुख्य विकास अधिकारी, जिला विकास अधिकारी, संबंधित उप जिलाधिकारी और खंड विकास अधिकारी से लगातार समन्वय बनाकर कार्य करने तथा समय-समय पर अधिकारियों का मार्गदर्शन प्राप्त करने के निर्देश दिए।
बैठक में संस्थान के अंतर्गत किए जा रहे सभी कार्यों की ब्रांडिंग और सोशल मीडिया के माध्यम से अधिकाधिक प्रचार-प्रसार करने पर भी विशेष जोर दिया गया। साथ ही मास्टर ट्रेनरों को अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों द्वारा किए जा रहे जड़ी-बूटी उत्पादन कार्यों का समय-समय पर भ्रमण और निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में वैज्ञानिक डॉ. डी.एस. बिष्ट, डॉ. सी.पी. कुनियाल, डॉ. अरविंद कुमार भंडारी, सचिव भेषज संघ चमोली श्री विवेक मिश्रा तथा सहायक शोध अधिकारी श्री विनीत पुरोहित ने भौतिक रूप से प्रतिभाग किया। वहीं संस्थान के समस्त मास्टर ट्रेनर ऑनलाइन माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
बैठक का मुख्य उद्देश्य जड़ी-बूटी कृषिकरण को गांव-गांव तक पहुंचाना, किसानों और महिला समूहों को इससे जोड़ना, गुणवत्तापूर्ण पौध उपलब्ध कराना और जड़ी-बूटी के क्षेत्र में शोध एवं विकास कार्यों को नई गति देना रहा।

