डीएम मयूर दीक्षित के निर्देशन में डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह की अभिनव पहल, हर रविवार चलेंगी प्रेरणादायी गतिविधियां
हरिद्वार। उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद में ग्रामीण बच्चों के उज्ज्वल भविष्य और नैतिक विकास को ध्यान में रखते हुए एक अनूठी और प्रेरणादायी पहल शुरू की गई है। अब ग्राम पंचायतों में बने मिनी सचिवालय केवल प्रशासनिक कार्यों के केंद्र नहीं रहेंगे, बल्कि उन्हें “राष्ट्र निर्माण केंद्र” के रूप में विकसित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य गांवों के बच्चों को नैतिक शिक्षा, संस्कार, राष्ट्रभक्ति और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक बनाना है।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह द्वारा इस अभिनव योजना की शुरुआत की गई है। डीपीआरओ कार्यालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार पहले चरण में जनपद के 25 मिनी सचिवालयों में “राष्ट्र निर्माण केंद्र” संचालित किए जाएंगे। यहां गांवों के कक्षा 1 से 5 तक के बच्चों को हर रविवार अथवा अवकाश दिवस पर सुबह 9 बजे से 11 बजे तक विशेष गतिविधियों के माध्यम से जोड़ा जाएगा।

इन केंद्रों में बच्चों को केवल किताबों तक सीमित शिक्षा नहीं दी जाएगी, बल्कि उन्हें नैतिक मूल्यों, अनुशासन, सामाजिक व्यवहार, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, राष्ट्रप्रेम, नशे से बचाव और समाज में बढ़ रही विभिन्न बुराइयों के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसके साथ-साथ खेलकूद, योग, कहानी वाचन, प्रेरणादायी प्रसंग, देशभक्ति गीत, सांस्कृतिक गतिविधियां और व्यक्तित्व विकास से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे, ताकि बच्चों का सर्वांगीण विकास हो सके।
रानीपुर विधायक आदेश चौहान ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि आज के समय में बच्चों को केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि अच्छे संस्कार और सकारात्मक वातावरण देना भी बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस प्रकार के राष्ट्र निर्माण केंद्र भविष्य में समाज और देश को बेहतर नागरिक देने का कार्य करेंगे। विधायक ने इसे सरकार और प्रशासन की दूरदर्शी सोच बताते हुए कहा कि यह पहल गांवों में शिक्षा और संस्कारों का नया वातावरण तैयार करेगी।
डीपीआरओ अतुल प्रताप सिंह ने कहा कि पंचायतें अब केवल सड़क, नाली और विकास योजनाओं तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि सामाजिक और नैतिक विकास में भी अहम भूमिका निभाएंगी। उन्होंने बताया कि इस योजना में स्थानीय शिक्षकों, अभिभावकों, बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों और सेवानिवृत्त कर्मचारियों का सहयोग लिया जाएगा। गांव के अनुभवी लोग बच्चों को अपने अनुभवों और प्रेरणादायी बातों के माध्यम से जीवन की सही दिशा दिखाने का कार्य करेंगे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में मोबाइल और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के कारण बच्चों का ध्यान तेजी से भटक रहा है। ऐसे में गांव स्तर पर सकारात्मक और संस्कारयुक्त वातावरण तैयार करना समय की आवश्यकता बन गया है। “राष्ट्र निर्माण केंद्र” इसी सोच के साथ तैयार किए जा रहे हैं, ताकि बच्चे छोटी उम्र से ही देश, समाज और परिवार के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझ सकें।
ग्राम प्रधान प्रमोद पाल ने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर पर इस पहल को लेकर काफी उत्साह है। गांव के लोग भी चाहते हैं कि बच्चों को बेहतर संस्कार और सकारात्मक दिशा मिले। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायतें इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए हर संभव सहयोग करेंगी और बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में शुरू की गई यह पहल अब चर्चा का विषय बनी हुई है। शिक्षा के साथ संस्कार और नैतिक मूल्यों को जोड़ने की यह कोशिश हरिद्वार जनपद में बच्चों के भविष्य निर्माण की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जा सकता है।

