समाचार प्रहरी 24 रिपोर्ट – राजकुमार
हरिद्वार, 24 अगस्त 2026। कांवड़ मेला-2026 के दौरान हरिद्वार नगर निगम की सफाई व्यवस्था को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। वार्ड प्रतिनिधियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने नगर आयुक्त के समक्ष सफाई कर्मचारियों की तैनाती, मस्टर रोल, वास्तविक उपस्थिति और वेतन भुगतान में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष एवं विस्तृत जांच की मांग की है।
प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि कांवड़ मेले के दौरान सफाई व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में कर्मचारियों की तैनाती कागजों में दर्शाई गई, लेकिन मौके पर उनकी वास्तविक उपस्थिति दर्ज संख्या से काफी कम दिखाई दी। प्रतिनिधिमंडल ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता की आशंका बताते हुए मस्टर रोल से लेकर कर्मचारियों के बैंक खातों में किए गए भुगतान तक की जांच कराने की मांग की है।
मस्टर रोल में कथित घोस्ट एंट्री का आरोप
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, कांवड़ मेला सफाई व्यवस्था के लिए तैयार किए गए मस्टर रोल में कई ऐसी एंट्री होने की आशंका है, जिनका मौके पर मौजूद कर्मचारियों से मिलान किया जाना जरूरी है।
प्रतिनिधिमंडल का दावा है कि कुछ स्थानों पर मस्टर रोल में जितने कर्मचारियों की संख्या दिखाई गई, मौके पर उससे काफी कम कर्मचारी कार्य करते हुए मिले। इसी आधार पर प्रतिनिधिमंडल ने कथित घोस्ट एंट्री, फर्जी उपस्थिति और वास्तविक संख्या से अधिक कर्मचारियों को दर्शाने की आशंका जताई है।
हालांकि, ये सभी आरोप फिलहाल प्रतिनिधिमंडल की ओर से लगाए गए हैं। इनकी स्वतंत्र जांच और नगर निगम अथवा किसी सक्षम जांच एजेंसी द्वारा आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
40 कर्मचारियों की सूची, मौके पर करीब 15 मिलने का दावा
प्रतिनिधिमंडल द्वारा नगर आयुक्त के समक्ष रखे गए विवरण के मुताबिक Shift-A में करीब 40 कर्मचारियों की सूची दिखाई गई थी, लेकिन मौके पर औसतन लगभग 15 कर्मचारी ही उपस्थित पाए जाने का दावा किया गया है।
इसी तरह Shift-C में करीब 30 कर्मचारियों की तैनाती दर्ज होने के बावजूद मौके पर औसतन लगभग 20 कर्मचारियों की उपस्थिति होने का दावा प्रतिनिधिमंडल ने किया है।
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि यदि मस्टर रोल में दर्ज कर्मचारियों और वास्तविक रूप से मौके पर कार्य करने वाले कर्मचारियों की संख्या में लगातार इतना अंतर रहा है, तो इसकी वजह स्पष्ट करना बेहद जरूरी है।
30 जुलाई से 12 अगस्त के बीच तैनाती पर भी सवाल
प्रतिनिधिमंडल ने कांवड़ मेले के महत्वपूर्ण दिनों के दौरान सफाई कर्मचारियों की तैनाती से जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच कराने की मांग की है।
आरोप है कि 30 जुलाई से 12 अगस्त के बीच महत्वपूर्ण मार्गों और सफाई क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कर्मचारियों की तैनाती कागजों में दिखाई गई। प्रतिनिधिमंडल ने आशंका जताई है कि इन रिकॉर्ड में कुछ ऐसी एंट्री हो सकती हैं, जिनका वास्तविक ड्यूटी स्थल और उपस्थिति रजिस्टर से मिलान किया जाना चाहिए।
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि प्रत्येक कर्मचारी की ड्यूटी, उपस्थिति और भुगतान का रिकॉर्ड यदि आपस में मिलाया जाए तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
मृत या गैर-हाजिर कर्मचारियों के नाम पर भुगतान की भी जांच की मांग
मामले को और गंभीर बताते हुए प्रतिनिधिमंडल ने ऐसे आरोपों की भी जांच की मांग की है, जिनमें कथित तौर पर मृत कर्मचारियों अथवा लंबे समय से गैर-हाजिर कर्मचारियों के नाम पर भुगतान किए जाने की आशंका जताई गई है।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि सभी कर्मचारियों की पहचान उनके आधिकारिक Employee ID से कराई जाए और मस्टर रोल में दर्ज प्रत्येक नाम का वास्तविक कर्मचारी से सत्यापन कराया जाए।
बैंक खातों में पहुंचे भुगतान की हो जांच
प्रतिनिधिमंडल ने केवल मस्टर रोल की जांच तक मामला सीमित रखने के बजाय कर्मचारियों को किए गए भुगतान की पूरी प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की है।
इसके लिए निम्न रिकॉर्ड का सत्यापन कराने की मांग की गई है—
कर्मचारियों की Master List
Working Day Sheet
Payment Confirmation Log
कर्मचारियों के खातों में किए गए भुगतान का DBT Record
कर्मचारियों के Official Employee IDs
मस्टर रोल और बैंक भुगतान का आपसी मिलान
संबंधित आउटसोर्स एजेंसी के बिल और भुगतान रिकॉर्ड
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि यदि मस्टर रोल में किसी कर्मचारी की उपस्थिति दर्ज है, तो उसके आधार पर किए गए भुगतान का बैंक रिकॉर्ड भी उपलब्ध होना चाहिए। इसी तरह वास्तविक कार्य दिवस और भुगतान किए गए दिनों का मिलान करने पर किसी भी संभावित अनियमितता का पता लगाया जा सकता है।
एक ही परिवार के सदस्यों के खातों में भुगतान का आरोप
प्रतिनिधिमंडल ने यह आरोप भी लगाया है कि कुछ मामलों में एक ही परिवार के दो सदस्यों के बैंक खातों में बड़ी मात्रा में वेतन पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि ऐसे सभी मामलों में कर्मचारियों की पहचान, उनकी वास्तविक तैनाती, कार्य दिवस और भुगतान राशि का सत्यापन कराया जाए।
हालांकि, इस आरोप की भी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और इसकी वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
आउटसोर्स कंपनी और सुपरवाइजरों की भूमिका की भी जांच की मांग
मामले में प्रतिनिधिमंडल ने केवल कर्मचारियों के स्तर पर जांच की मांग नहीं की है, बल्कि संबंधित सुपरवाइजर, अधिकारी और आउटसोर्स एजेंसी की भूमिका की भी जांच कराने की मांग रखी है।
प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि यदि मस्टर रोल में गलत उपस्थिति दर्ज हुई या वास्तविक संख्या से अधिक कर्मचारियों के नाम पर भुगतान हुआ है तो इसकी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
नगर आयुक्त से क्या-क्या मांगा गया?
प्रतिनिधिमंडल ने नगर आयुक्त के समक्ष मुख्य रूप से निम्न रिकॉर्ड की जांच और उपलब्धता की मांग रखी—
- कांवड़ मेले के दौरान कार्यरत सभी सफाई कर्मचारियों की Master List।
- प्रत्येक कर्मचारी की Working Day Sheet।
- कर्मचारियों के वेतन भुगतान का Payment Confirmation Log।
- बैंक खातों में किए गए भुगतान का DBT Record।
- सभी कर्मचारियों के Official Employee IDs का सत्यापन।
- मस्टर रोल और मौके की वास्तविक उपस्थिति का मिलान।
- आउटसोर्स कंपनी द्वारा प्रस्तुत बिलों और नगर निगम द्वारा किए गए भुगतान का सत्यापन।
- संदिग्ध अथवा विवादित कर्मचारियों की अलग से जांच।
एक सप्ताह में कार्रवाई की मांग, धरने की चेतावनी
प्रतिनिधिमंडल ने नगर आयुक्त से पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच कराने की मांग करते हुए कहा है कि यदि जांच में किसी कर्मचारी, सुपरवाइजर, अधिकारी या आउटसोर्स कंपनी की भूमिका सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने कार्रवाई के लिए एक सप्ताह का समय देने की बात कही है। आरोप है कि यदि इस अवधि में मामले में प्रभावी कार्रवाई नहीं होती है तो नगर निगम परिसर में नगर आयुक्त कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा।
इसके साथ ही प्रतिनिधिमंडल ने शासन स्तर पर भी दस्तावेजों के साथ मामला उठाने की चेतावनी दी है।
अब सबसे बड़ा सवाल—कागज और जमीन पर कितने कर्मचारी?
कांवड़ मेला हरिद्वार के लिए बेहद महत्वपूर्ण आयोजन है और इस दौरान सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाता है। ऐसे में यदि कर्मचारियों की संख्या, उनकी वास्तविक उपस्थिति और भुगतान को लेकर सवाल उठते हैं तो उनका रिकॉर्ड के आधार पर जवाब मिलना जरूरी है।
अब पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि—
क्या मस्टर रोल में दर्ज कर्मचारियों की संख्या मौके पर मौजूद कर्मचारियों से मेल खाती है?
क्या सभी कर्मचारियों ने वास्तव में उतने ही दिन काम किया, जितने दिन का भुगतान दर्शाया गया?
क्या DBT और बैंक भुगतान रिकॉर्ड मस्टर रोल से पूरी तरह मेल खाते हैं?
और क्या कांवड़ मेला-2026 की सफाई व्यवस्था में किसी तरह की वित्तीय अनियमितता हुई है?
इन सवालों का जवाब अब जांच के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल प्रतिनिधिमंडल द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है। यदि नगर निगम रिकॉर्ड की विस्तृत जांच कराता है, तो मस्टर रोल, वास्तविक उपस्थिति और भुगतान से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
समाचार प्रहरी 24 की नजर इस पूरे मामले पर बनी रहेगी।

