समाचार प्रहरी 24 | हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में शराब के ठेकों पर निर्धारित मूल्य से अधिक पैसे वसूले जाने का मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार ऐसी शिकायतें सामने आ रही हैं कि कई शराब ठेकों पर ग्राहकों से शराब की बोतलों और बीयर पर अंकित एमआरपी से अधिक रकम वसूली जा रही है। हैरानी की बात यह है कि कई बार शिकायतें किए जाने के बावजूद भी संबंधित विभाग और प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिससे आम लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शराब ठेकों पर खुलेआम ओवररेटिंग का खेल चल रहा है। कई उपभोक्ताओं ने बताया कि शराब की बोतलों पर निर्धारित मूल्य साफ तौर पर लिखा होने के बावजूद उनसे 10, 20, 30 और कहीं-कहीं 50 रुपये तक अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं। जब ग्राहक इसका विरोध करते हैं तो ठेका कर्मचारियों द्वारा अभद्र व्यवहार किया जाता है और कई बार ग्राहकों को शराब देने से भी मना कर दिया जाता है।
लोगों का कहना है कि यह स्थिति केवल एक-दो ठेकों तक सीमित नहीं है, बल्कि हरिद्वार के कई क्षेत्रों में यही हाल देखने को मिल रहा है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि ओवररेटिंग की शिकायतें आबकारी विभाग तक कई बार पहुंच चुकी हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं। यही वजह है कि शराब ठेका संचालकों और कर्मचारियों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।
स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है कि जब सरकार द्वारा शराब की प्रत्येक बोतल का मूल्य निर्धारित किया गया है तो फिर ग्राहकों से अतिरिक्त रकम आखिर किस आधार पर वसूली जा रही है। लोगों का कहना है कि यदि कोई दुकानदार अन्य वस्तुओं पर एमआरपी से अधिक रकम वसूलता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होती है, लेकिन शराब ठेकों पर खुलेआम नियमों की अनदेखी के बावजूद जिम्मेदार विभाग चुप्पी साधे बैठा है।
सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन तथा आबकारी विभाग से मांग की है कि ऐसे शराब ठेकों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर सख्त कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो उपभोक्ताओं के साथ मिलकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर शिकायतों के बावजूद हरिद्वार में शराब ठेकों पर ओवररेटिंग का खेल कब तक चलता रहेगा और जिम्मेदार विभाग कब कार्रवाई करेगा।

